Tuesday, April 16, 2019

पेरिस के ऐतिहासिक नॉट्र डाम चर्च की भीषण आग

कश्मीर को लेकर दोनों देशों में भावनाओं का ध्रुवीकरण काफ़ी मज़बूत है. दोनों देशों की सियासी पार्टियों के लिए यह ध्रुवीकरण फ़ायदे के लिए होता है.
कई लोग इस बात को भी मानते हैं कि भारत में बीजेपी सत्ता में होती है तो पाकिस्तान को मुख्यधारा की राजनीति में जिहादी समूहों की सक्रियता को सही ठहराने में मदद मिलती है.
मुबारक़ अली कहते हैं, ''भारत में बीजेपी के शासन में अगर मुसलमानों के ख़िलाफ़ कुछ होता है तो पाकिस्तान में एक आम सोच ये बनती है कि जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश पाकिस्तान बनाकर बिल्कुल सही किया था. लोग कहना शुरू कर देते हैं कि अगर पाकिस्तान नहीं बनता तो सभी मुसलमानों के साथ यही होता. पाकिस्तान में सियासी पार्टियों को एक मज़बूत तर्क मिल जाता है. जिहादी संगठन भी कहना शुरू कर देते हैं कि धर्म के आधार पर भारत का बँटना कितना ज़रूरी था.''
मुबारक़ अली कहते हैं कि पाकिस्तान में जब हिन्दुओं पर अत्याचार होता है तो यह बीजेपी को रास आता है क्योंकि इसके आधार पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिन्दुओं को लामबंद करने का हथियार मिल जाता है.
वो कहते हैं, ''पाकिस्तान में हिन्दू बहुत कम संख्या में बचे हैं. जो हैं भी, वो दीन-हीन स्थिति में हैं. पाकिस्तान की सियासी पार्टियों को हिन्दुओं का डर दिखाकर पाकिस्तान में मुसलमानों को लामबंद करने का आधार नहीं मिल पाता है. ऐसे में पाकिस्तान की सियासी पार्टियां भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ होने वाले वाक़यों का इस्तेमाल करती हैं. जिहादी ग्रुपों को भी एक बहाना मिल जाता है कि भारत के मुसलमान कितने संकट में हैं.''
क्या बीजेपी के सत्ता में होने से पाकिस्तान के जिहादी समूहों को प्रासंगिकता मिलती है? इस सवाल के जवाब में बीजेपी नेता शेषाद्री चारी कहते हैं, ''पाकिस्तान अपने देश के मुसलमानों की चिंता करे. हिन्दुओं की सुरक्षा की उम्मीद तो इनसे नहीं ही कर सकते. मोदी दोबारा प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के चाहने से नहीं बनेंगे. मोदी को प्रधानमंत्री यहां की जनता बनाएगी.''
लेकिन भारत में किसी मुसलमान को गोमांस के नाम पर पीट-पीट कर मार दिया जाता है और समझौता ट्रेन ब्लास्ट में किसी को सज़ा नहीं मिलती है तो क्या इन चीज़ों का इस्तेमाल पाकिस्तानी जिहादी समूह अपनी प्रासंगकिता साबित करने में नहीं करते हैं?
इस पर शेषाद्री चारी कहते हैं, ''भारत के मुसलमान बहुत ख़ुश हैं. भारत के मुसलमानों को लेकर पाकिस्तान अपने यहां बातें करता है तो यह बिल्कुल ग़लत है. समझौता ब्लास्ट में कोर्ट ने निर्णय दिया है और हमें यह स्वीकार है. पिछली सरकार ने लोगों पर फ़र्ज़ी मुक़दमे कराए थे. पाकिस्तान अपने बारे में सोचे तो ज़्यादा ठीक रहेगा. पाकिस्तान में हिन्दू तो छोड़ ही दीजिए, मुसलमानों में शिया और अहमदिया तक सुरक्षित नहीं हैं.''
मुबारक़ अली कहते हैं कि दोनों मुल्कों में अतिवाद को समर्थन देने वाले लोगों को खाद-पानी अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ होने वाले अन्याय से ही मिलते हैं.
वो कहते हैं, ''पाकिस्तान में भारत विरोधी भावना के लिए भारत में मुसलमान विरोधी सरकार का होना बहुत ज़रूरी है. और पाकिस्तान में भारत विरोधी भावना यहां की सियासी पार्टियों के लिए काफ़ी उपयोगी है. उसी तरह भारत में पाकिस्तान विरोधी भावना को यहां के हिन्दुओं पर अत्याचार से हवा मिलती है. मतलब दोनों देशों के अतिवादी संगठनों के लिए दोनों देशों में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार होना उनके हक़ में होता है.''

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